मुंबई, XX जुलाई 2026: महाराष्ट्र में बार-बार हो रही बिजली कटौती अब सामान्य व्यवधान नहीं, बल्कि बिजली वितरण व्यवस्था पर बढ़ते दबाव का संकेत है। नागपुर में ट्रांसफॉर्मर खराबी, मुंबई में लंबे पॉवर कट और नवी मुंबई में विरोध प्रदर्शन बताते हैं कि पीक डिमांड और चरम मौसम के दौरान वितरण नेटवर्क की कमजोरियां और स्पष्ट हो रही हैं।
शहरीकरण की रफ्तार से पिछड़ता बुनियादी ढांचा
मुंबई और आसपास के क्षेत्रों में तेज शहरीकरण ने मौजूदा बिजली ढांचे पर दबाव बढ़ा दिया है। इस गर्मी में खारघर जैसे इलाकों में छह-छह घंटे तक बिजली कटौती, रिकॉर्ड मांग के कारण नागपुर में ट्रांसफॉर्मर फेल होना, पुणे में 24 घंटे से अधिक की बिजली कटौती और नवी मुंबई में लगातार कटौती के खिलाफ विरोध प्रदर्शन—ये सभी समय पर नेटवर्क विस्तार और आधुनिकीकरण की जरूरत को रेखांकित करते हैं।
असुविधा से जोखिम की ओर
लगातार बिजली कटौती केवल असुविधा नहीं है। वोल्टेज में उतार-चढ़ाव से उपकरणों को नुकसान हो सकता है, जबकि ट्रांसफॉर्मर खराबी बिजली सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ाती है। धीमी मरम्मत और कमजोर संवाद से उपभोक्ताओं का भरोसा भी प्रभावित होता है। बुजुर्गों, बच्चों और निर्बाध बिजली पर निर्भर मरीजों के लिए यह जन-कल्याण से जुड़ा मुद्दा बन जाता है।
विशेषज्ञ राय: व्यवस्था में व्यापक सुधार की जरूरत
समता पावर के निदेशक डी.डी. अग्रवाल के अनुसार, हालिया बिजली कटौती यह दिखाती है कि बिजली परिसंपत्तियों के रखरखाव और दीर्घकालिक योजना को मजबूत करने की जरूरत है। बिजली नेटवर्क में अब प्रतिक्रियात्मक मरम्मत के बजाय कंडीशन-बेस्ड और प्रेडिक्टिव मेंटेनेंस की ओर बढ़ना आवश्यक है। डिजिटल मॉनिटरिंग, प्रेडिक्टिव मेंटेनेंस और सक्रिय एसेट मैनेजमेंट आधुनिक बिजली व्यवस्था के लिए अहम हैं।
अग्रवाल ने कहा कि महाराष्ट्र की बिजली कंपनियों को निर्णायक कदम उठाने होंगे। MSEDCL जैसी यूटिलिटीज को ग्रिड मजबूती के लिए बुनियादी ढांचे का उन्नयन, ट्रांसफॉर्मर क्षमता बढ़ाना और प्रेडिक्टिव मेंटेनेंस अपनाना चाहिए। वहीं BEST जैसी शहरी यूटिलिटीज को केबल रिप्लेसमेंट, डिजिटल निगरानी और उपभोक्ता संचार को और मजबूत करना होगा। रियल-टाइम सूचना व्यवस्था से योजनाबद्ध और अचानक होने वाली कटौती के दौरान पारदर्शिता बढ़ेगी।
उन्होंने कहा, “RDSS जैसी योजनाओं के तहत नए 33/11 kV सब-स्टेशन, ट्रांसफॉर्मर क्षमता वृद्धि और फीडर ऑग्मेंटेशन पर निवेश के बावजूद डिस्ट्रीब्यूशन लॉस और और आपूर्ति में व्यवधान, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में, अब भी बने हुए हैं। यह चुनौती केवल महाराष्ट्र तक सीमित नहीं है; उत्तर प्रदेश और पंजाब जैसे राज्य भी इसी तरह की समस्याओं से जूझ रहे हैं।”
मानसून आने के बाद महाराष्ट्र में बिजली मांग गर्मियों के पीक स्तर से कम हुई है, जिससे ट्रांसफॉर्मर और वितरण नेटवर्क पर दबाव घटा है। यही समय यूटिलिटीज के लिए प्रिवेंटिव मेंटेनेंस, पुराने ट्रांसफॉर्मर और केबल बदलने, ओवरलोडेड एसेट्स को मजबूत करने और कमजोर नेटवर्क हिस्सों को सुधारने का उचित अवसर है। अगली गर्मियों से पहले यह काम पूरा होने पर सिस्टम की मजबूती और बिजली आपूर्ति की विश्वसनीयता बढ़ेगी।
अग्रवाल ने आगे कहा, “हालिया बिजली कटौती ग्रिड आधुनिकीकरण, प्रिवेंटिव मेंटेनेंस और यूटिलिटीज, नियामकों व उद्योग हितधारकों के बीच समन्वित योजना में निरंतर निवेश की जरूरत को रेखांकित करती है। इन चुनौतियों से निपटने के लिए समयबद्ध निवेश, आधुनिक एसेट मैनेजमेंट और सभी पक्षों के बीच सतत सहयोग जरूरी है।”
अधिक जानकारी के लिए संपर्क करें:
श्री डी.डी. अग्रवाल, निदेशक, समता पावर: agarwaldd@ yahoo.com

महाराष्ट्र की बिजली व्यवस्था पर बढ़ता दबाव: समय रहते सुधार जरूरी